धनतेरस पर पीतल खरीदने का क्या है महत्व ?


धार्मिक शास्त्रों के अनुसार भगवान धनवंतरी को नारायण भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है, जो आरोग्य प्रदान करते हैं। इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से दो भुजाओं में वे शंख एवं चक्र धारण किए हुए हैं और अन्य दो भुजाओं में औषधि के साथ वे अमृत कलश रखते हैं।पुराणों के अनुसार द्रौपदी को पीतल का अक्षय पात्र वरदान स्वरूप दिया गया था।

ऐसा माना जाता है कि यह अमृत कलश पीतल का बना हुआ है क्योंकि पीतल भगवान धनवंतरी की प्रिय धातु है। यही कारण है कि भगवान धनवंतरी के जन्मदिवस अर्थात धनतेरस पर लोग खास तौर से पीतल के बर्तन खरीदते हैं। वैसे इस दिन कोई भी धातु की बनी वस्तुएं खरीदने का महत्व है।

जैसे सोना, चांदी, तांबा, पीतल, कांसा आदि। धनतेरस को लेकर मान्यता है, कि इस दिन खरीदी गई कोई भी वस्तु शुभ फल प्रदान करती है और लंबे समय तक चलती है लेकिन पीतल खरीदने से तेरह गुना अधिक लाभ मिलता है। इसके अलावा भी अन्य कई बर्तनों की खरीदी भी इस दिन खूब होती है।

अत: धनतेरस के दिन पीतल खरीदने से घर में आरोग्य, सौभाग्य और सेहत की दृष्टि से शुभता आती है। क्योंकि पीतल को गुरुदेव बृहस्पति की धातु माना जाता है, जो कि बहुत ही शुभ होती है। इसीलिए गुरु ग्रह की शांति के लिए पीतल के बर्तनों का इस्तेमाल अधिक से अधिक किया जाता है।

आयुर्वेद में भी पीतल के बर्तन में भोजन करना अत्यंत लाभकारी बताया गया है। इतना ही नहीं धन त्रयोदशी या धनतेरस के दिन पीतल खरीदने से घर में 13 गुना शुभ फल बरसने की भी मान्यता है।